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वादा

? श्रीधर शर्मा

 

शादी से पहले से ही पत्‍नी एक लड़के से प्यार करती थी। वह प्रेमी शादी के बाद भी उससे मिलने आता रहता था। जब पति ऑफिस के लिए निकलता तब प्रेमी घर में प्रवेश करता था।

पति हँसमुख और स्पष्टवादी व्यक्ति था। वह अपनी पत्‍नी को जी-जान से प्यार करता था। कभी उसे शक या अविश्वास की नज़र से नहीं देखता था। दोनों ने कभी एक-दूसरे से झूठ न बोलने का वादा किया था।

एक दिन कारणवश पति अचानक घर आ पहुँचा। उस वक़्त पत्‍नी अपने प्रेमी के साथ शयनकक्ष में व्यस्त थी। पति ने कॉलबेल बजाया। पत्‍नी हड़बड़ाकर उठ बैठी, प्रेमी को पिछले दरवाजे से चलता किया और कपड़े सम्हालते हुए दरवाजा खोलने आ गई।

पति ने सोचा शायद सोकर उठी होगी, इसलिए कपड़े अस्त-व्यस्त हो गए होंगे। फिर उंनीदी होने के कारण चेहरे का नूर ग़ायब हो गया होगा।

पति हँसते हुए पत्‍नी से दिल्लगी करने लगा- "लगता है किसी से कुश्ती लड़कर आई हो ?"

पति की बातों से पत्‍नी के होश फाख़्ता होने लगे पर संभलते हुए बोली "जिसके साथ कुश्ती लड़नी है वह तो अभी ऑफिस से आ रहा है।"

"क्या दूसरा आदमी नहीं हो सकता ?" पति ने पत्‍नी के गालों को चूमा।

"दूसरा आदमी ?" जवाब में पत्‍नी ने पति को चूमते हुए कहा "किसी भी पराए मर्द को मैंने आजतक सीधी आँखों से नहीं देखा है। क्या आपको मेरी बात पर यकिन नहीं है? हमने एक दूसरे से कभी झूठ न बोलने का वादा जो किया है।"

पत्‍नी अपने प्रेमी को सिर्फ तिरछी नजरों से ही देखती थी, और इस बात पर उसे पक्का यकिन था कि वह पति से कभी झूठ नहीं बोल सकती।

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मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी।

 

इटहरी में रहकर साहित्य सृजन करनेवाले श्री श्रीधर शर्मा की एक बालबोध कथा संग्रह सुनजुँगे र कलजुँगे प्रकाशित है। वे बाल-साहित्य, लघुकथाएँ और कविताएँ लिखते हैं। उनकी लघुकथाओं का एक संग्रह शीघ्र ही प्रकाश में आ रहा है।