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गजल
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ज्ञानुवाकर पौड़ेल
पुरस्कृत क्यों यहाँ बेइमान हुआ
बंधक आज हर एक का ईमान हुआ।
भ्रष्ट था जो कलतक
कैसे वह आज महान हुआ।
तुम्हारे कारण, सिर्फ तुम्हारे कारण
मालूम है देश का कितना नुकसान हुआ !
आपसी झगड़े और काटमार से
खून-सना इस देश का संविधान हुआ।
कहाँ हैं ईमानदार नेता-गण
निरर्थक मेरा मतदान हुआ।
सोचते सोचते इस देश का भविष्य
बीती रात और सुबह का आगमन हुआ।
नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी
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