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पहला पुरुष - अंतिम नारी

                           ? डॉ अभि सुवेदी

 

पहले पुरुष और

अंतिम नारी की दूरी

समय  नहीं भर पाता

बोली, उच्चरित नहीं होती

पहले पुरुष की अंतिम नारी और

अंतिम नारी के पहले पुरुष के बीच

एक आकाश टंगा हुआ है

वहां शब्द नहीं हैं,

इतिहास नहीं है

सिर्फ ‘अब’ है

सिर्फ जीवन है

सिर्फ पीड़ा का आलिंगन है।

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शब्दों के किनारों पर

                        ? डॉ अभि सुवेदी

 

रात को

कितने आँसू वह गए

मालूम नहीं,

सुबह नदी की सां-सां सुनने पर

बहता हुआ दिल ढूँढ़ निकालने के लिए

मैं शब्दों के किनारों पर दौड़ चला ।

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दोनों कविताओं का मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी