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चौक ? भूपी शेरचन
सँकरी गली में मेरा चौक है। क्या नहीं है यहाँ ? सबकुछ है। अनगिनत बीमारियाँ हैं अनंत भूख है अथाह शोक है केवल हर्ष नहीं है क्योंकि उसपर प्रतिबंध है।
सँकरी गली में मेरा चौक है। क्या नहीं है ? सबकुछ है।
मेरे इस चौक में देवता के बनाए लोग हैं लोगों के बनाए देवता हैं पर ये सब उदास हैं ये सब निराश हैं लोग उदास इसलिए क्योंकि रातभर खटमल इन्हें काटते हैं दिनभर रूपए इन्हें टोकते हैं और देवता उदास इसलिए क्योंकि उन्हें न कोई पूजता है न कोई प्रणाम करता है इसलिए देवता और लोग एक-दूसरे को धिक्कारते हुए एक साथ शिर पीटते हैं।
सँकरी गली में मेरा चौक है क्या नहीं है यहाँ ? सबकुछ है।
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मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी |